बरेली। श्री भारत अभ्युदय न्यास द्वारा शहर की सड़कों पर आवारा घूमने वाली गायों को प्लास्टिक के जानलेवा संकट से बचाने के लिए 5 जनवरी को एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। हमारी संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र 'प्लास्टिक कचरा प्रबंधन' रहा, ताकि गायों को कचरे में फंसे प्लास्टिक के थैलों को खाने से रोका जा सके।
प्लास्टिक: बेजुबानों के लिए धीमा जहर
अभियान के दौरान पर्यावरण विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों ने नागरिकों को प्लास्टिक के गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराया। वक्ताओं ने बताया कि अक्सर लोग खाने-पीने की चीजें प्लास्टिक की थैलियों में भरकर फेंक देते हैं। भोजन की तलाश में गायें इन थैलियों को भी निगल लेती हैं, जिससे उनके पेट में प्लास्टिक जमा हो जाता है। यह प्लास्टिक उनके पाचन तंत्र को पूरी तरह ठप कर देता है, जो अंततः उनकी तड़प-तड़प कर होने वाली मृत्यु का कारण बनता है।
कार्यक्रम की मुख्य बातें:
थैला वितरण: लोगों को प्लास्टिक बैग का विकल्प देने के लिए कपड़े और जूट के थैले वितरित किए गए।
कचरा पृथक्करण: निवासियों को गीला और सूखा कचरा अलग करने का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि खाद्य सामग्री प्लास्टिक में न मिले।
नुक्कड़ नाटक: स्थानीय युवाओं ने नाटक के माध्यम से यह दिखाया कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही किसी बेजुबान की जान ले सकती है।
संस्था का संकल्प
संस्था के पदाधिकारियों ने बरेली के नागरिकों से अपील की कि वे सड़कों पर कचरा न फेंकें और 'सिंगल यूज़ प्लास्टिक' का बहिष्कार करें। यह पहल न केवल पर्यावरण को स्वच्छ बनाएगी, बल्कि हमारी गौ माता को भी स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद करेगी।
इस सफल आयोजन के बाद अब संस्था आगामी 28 जनवरी को शाहजहाँपुर में 'गौ उत्पाद शिविर' के माध्यम से इस मिशन को और आगे बढ़ाएगी।